तीज 2026: हरियाली, कजरी और हरतालिका तीज, तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि एवं ज्योतिषीय महत्व
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रिचा पाठक, संस्थापक, ज्योतिष धाम, द्वारा एक वैदिक मार्गदर्शिका
"तीज केवल एक व्रत नहीं, बल्कि माता पार्वती की उस अटूट श्रद्धा का उत्सव है जिसने असंभव को भी संभव बना दिया। यही श्रद्धा जब स्त्री के जीवन में उतरती है, तो हर रिश्ता अखंड सौभाग्य से भर जाता है।" , रिचा पाठक
श्रावण और भाद्रपद माह सुहागिन और कुंवारी दोनों ही स्त्रियों के लिए विशेष रूप से पावन माने जाते हैं, क्योंकि इन्हीं महीनों में हरियाली तीज 2026, कजरी तीज 2026 और हरतालिका तीज 2026, ये तीनों प्रमुख तीज पर्व मनाए जाते हैं। ज्योतिष धाम में हर वर्ष हमसे सैकड़ों महिलाएं तीनों तीज की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पति की दीर्घायु व सुखी दांपत्य जीवन के लिए ज्योतिषीय उपाय पूछती हैं। इस लेख में हम 2026 के सत्यापित पंचांग के अनुसार तीनों तीज 2026 पर्वों का पूरा विवरण, तीज पूजा विधि और महत्व साझा कर रहे हैं।
तीज 2026: तीनों प्रमुख तिथियां एक नज़र में
| तीज | तिथि / वार | पंचांग | शुभ मुहूर्त |
|---|---|---|---|
| हरियाली तीज 2026 | 15 अगस्त 2026, शनिवार | श्रावण शुक्ल तृतीया | सुबह 05:53 से 08:27 (2 घं. 34 मि.) |
| कजरी तीज 2026 (बड़ी तीज) | 31 अगस्त 2026, सोमवार | भाद्रपद कृष्ण तृतीया | तृतीया तिथि: 30 अगस्त 09:36 AM से 31 अगस्त 08:50 AM |
| हरतालिका तीज 2026 | 14 सितंबर 2026, सोमवार | भाद्रपद शुक्ल तृतीया | प्रातःकाल मुहूर्त: सुबह 06:26 से 07:06 (41 मि.) |
तीज पर्व का ज्योतिषीय एवं आध्यात्मिक महत्व
- शिव-पार्वती पूजा: तीनों ही तीज पर्वों पर भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की पूजा की जाती है, जो दांपत्य प्रेम और सामंजस्य का प्रतीक है।
- अखंड सौभाग्य: सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन के लिए निर्जला अथवा फलाहार व्रत रखती हैं।
- कुंवारी कन्याओं के लिए: अविवाहित युवतियां शिव जैसे गुणवान वर की प्राप्ति हेतु व्रत रखकर माता पार्वती की आराधना करती हैं।
- सोलह श्रृंगार: हरे-पीले वस्त्र धारण करना, मेहंदी लगाना और सोलह श्रृंगार करना शुभ माना जाता है, हरा रंग विशेष रूप से बुध और सौभाग्य का प्रतीक है।
- झूला एवं लोकगीत: बरगद व नीम के वृक्षों पर झूला झूलना और तीज के पारंपरिक लोकगीत गाना श्रावण मास के उल्लास का हिस्सा है।
हरियाली तीज 2026 (छोटी तीज)
हरियाली तीज श्रावण मास की शुक्ल तृतीया को मनाई जाती है और इसे 'छोटी तीज' भी कहा जाता है। वर्ष 2026 में यह पर्व स्वतंत्रता दिवस के साथ भी मेल खाता है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। यह दिन माता पार्वती के 108वें जन्म और भगवान शिव से उनके पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है।
पंचांग विवरण, हरियाली तीज 2026
- तिथि: 15 अगस्त 2026, शनिवार
- पूजा शुभ मुहूर्त: सुबह 05:53 से 08:27 तक
- अवधि: 2 घंटे 34 मिनट
- तृतीया तिथि प्रारंभ: 14 अगस्त 2026 को शाम 06:46 बजे
- तृतीया तिथि समाप्त: 15 अगस्त 2026 को शाम 05:28 बजे
पूजा विधि
- प्रातःकाल स्नान कर हरे रंग के वस्त्र धारण करें।
- घर के पूजा स्थान या बरगद वृक्ष के नीचे शिव-पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।
- माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री, चूड़ी, बिंदी, मेहंदी, सिंदूर अर्पित करें।
- घी का दीपक जलाकर आरती करें और तीज माता की कथा सुनें।
- निर्जला अथवा फलाहार व्रत रखें और सुहाग की वस्तुएं सुहागिन महिलाओं को भेंट करें।
कजरी तीज 2026 (बड़ी तीज)
कजरी तीज, जिसे बड़ी तीज, कजली तीज या सातुड़ी तीज भी कहा जाता है, भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष तृतीया को मनाई जाती है। यह हरियाली तीज से अधिक कठिन व्रत माना जाता है क्योंकि इसमें रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात ही व्रत का पारण किया जाता है। यह पर्व मुख्यतः उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार में विशेष श्रद्धा से मनाया जाता है।
पंचांग विवरण, कजरी तीज 2026
- तिथि: 31 अगस्त 2026, सोमवार
- तृतीया तिथि प्रारंभ: 30 अगस्त 2026 को सुबह 09:36 बजे
- तृतीया तिथि समाप्त: 31 अगस्त 2026 को सुबह 08:50 बजे
- व्रत पारण: चंद्रोदय के पश्चात संध्या में चंद्र अर्घ्य देकर
पूजा विधि
- सूर्योदय से पूर्व स्नान कर निर्जला व्रत का संकल्प लें।
- नीम वृक्ष की पूजा करें, क्योंकि इस दिन नीम को विशेष महत्व दिया जाता है।
- शिव-पार्वती का पूजन करें और सत्तू का भोग अर्पित करें।
- संध्या समय चंद्रमा के उदय होने पर जल और दूध से अर्घ्य दें।
- अर्घ्य के पश्चात कथा सुनकर सत्तू व फल ग्रहण कर व्रत का पारण करें।
हरतालिका तीज 2026
हरतालिका तीज भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाई जाती है और यह गणेश चतुर्थी से एक दिन पूर्व आती है। यह तीनों तीज में सबसे कठिन व्रत माना जाता है, जिसमें महिलाएं पूरे 24 घंटे निर्जला व्रत रखकर रात्रि जागरण भी करती हैं। इस दिन नदी की रेत से भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमाएं बनाकर षोडशोपचार पूजन किया जाता है।
पंचांग विवरण, हरतालिका तीज 2026 (मुंबई)
- तिथि: 14 सितंबर 2026, सोमवार
- प्रातःकाल पूजा मुहूर्त: सुबह 06:26 से 07:06 तक
- अवधि: 41 मिनट
- तृतीया तिथि प्रारंभ: 13 सितंबर 2026 को सुबह 07:08 बजे
- तृतीया तिथि समाप्त: 14 सितंबर 2026 को सुबह 07:06 बजे
कृपया ध्यान दें कि तृतीया तिथि की गणना स्थान अनुसार भिन्न हो सकती है, अतः अपने शहर के स्थानीय पंचांग से मुहूर्त की पुनः पुष्टि अवश्य करें।
पूजा विधि
- रात्रि जागरण कर प्रातः स्नान करें और नए हरे अथवा लाल वस्त्र धारण करें।
- बालू या रेत से शिव-पार्वती एवं गणेश जी की प्रतिमा बनाएं।
- षोडशोपचार विधि से पूजन करें, जल, रोली, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप अर्पित करें।
- हरतालिका तीज की कथा सुनें और सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
- पूरे दिन निर्जला व्रत रखें और अगली सुबह पूजन के पश्चात ही पारण करें।
वास्तु टिप
पूजा स्थल को घर की उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में रखें, यह दिशा आध्यात्मिक ऊर्जा और सौभाग्य को बढ़ाती है।
तीज के दिन घर के मुख्य द्वार पर हरे तोरण या आम के पत्तों की बंदनवार लगाना दांपत्य जीवन में सामंजस्य लाता है।
रत्न एवं ज्योतिषीय उपाय
तीज के अवसर पर सुहागिन महिलाएं अपनी कुंडली के अनुसार शुक्र और चंद्रमा को मजबूत करने वाले उपाय कर सकती हैं, जो दांपत्य जीवन में मधुरता लाते हैं।
- प्रत्येक शुक्रवार माता लक्ष्मी को सफेद मिठाई अर्पित करें, इससे शुक्र ग्रह मजबूत होता है।
- सुहागिन महिलाएं चांदी की बिछिया या पायल धारण करें, जो चंद्रमा को शुभ फल देने वाली मानी जाती है।
- तीज के दिन किसी सुहागिन स्त्री को हरी चूड़ियां, सिंदूर या श्रृंगार सामग्री भेंट करें।
- यदि कुंडली में शुक्र दोष हो, तो तीज के दिन गाय को हरा चारा खिलाना विशेष लाभकारी रहता है।
एक क्लाइंट का अनुभव
केस स्टडी
पुणे की एक क्लाइंट, जिनकी कुंडली में शुक्र सप्तम भाव में पीड़ित था, विवाह के बाद से पति के साथ लगातार मतभेद का सामना कर रही थीं। ज्योतिष धाम द्वारा सुझाए गए तीज-विशेष शुक्र उपाय और एक वास्तु सुधार के बाद, तीन महीनों के भीतर उनके दांपत्य जीवन में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।
परिणाम प्रत्येक व्यक्ति की पूर्ण कुंडली, दशा और श्रद्धा पर निर्भर करते हैं; उपाय प्रयासों का स्थान नहीं लेते, बल्कि उन्हें सहयोग देते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न: क्या तीनों तीज पर एक साथ व्रत रखना आवश्यक है? नहीं, यह पूर्णतः व्यक्तिगत आस्था और पारिवारिक परंपरा पर निर्भर करता है।
प्रश्न: क्या कुंवारी लड़कियां तीज का व्रत रख सकती हैं? हां, कुंवारी कन्याएं शिव जैसे वर की प्राप्ति हेतु तीनों तीज का व्रत रख सकती हैं।
प्रश्न: यदि निर्जला व्रत संभव न हो तो क्या करें? स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और फलाहार व्रत का विकल्प चुनें; श्रद्धा ही व्रत का मूल तत्व है।
प्रश्न: हरतालिका तीज की तिथि क्षेत्रानुसार भिन्न क्यों दिखती है? तृतीया तिथि के उदयकाल की गणना शहर के सूर्योदय समय पर निर्भर करती है, इसलिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि आवश्यक है।
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रिचा पाठक एक तृतीय-पीढ़ी की वैदिक ज्योतिषी, वास्तु शास्त्र सलाहकार और अंक ज्योतिषी हैं, तथा ज्योतिष धाम की संस्थापक हैं, जो चंदिवली, पवई, मुंबई में स्थित है। 25 वर्षों से अधिक के अनुभव और विश्वभर में एक लाख से अधिक क्लाइंट्स के साथ, वे करियर, संबंधों, धन और संपत्ति से जुड़े व्यावहारिक एवं समाधान-केंद्रित मार्गदर्शन के लिए जानी जाती हैं, जिसमें कुंडली विश्लेषण, वास्तु सुधार और अंक ज्योतिष का समन्वित दृष्टिकोण शामिल है।